मिल्क मार्केट में अब मिलेगा ऊंटनी का दूध
पशुपालक अब सीधे बेच पायेगे ऊंटनी का दूध
मिल्क मार्केट में अब मिलेगा ऊंटनी का दूध
बीकानेर(राजस्थान). फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी आॅफ इंडिया (FSSI ) ने ऊंटनी के दूध को दो प्रतिशत फैट स्टैंडर्ड के आधार पर दूध को व्यापार या बाजार में बेचने की छूट दे दी है। इस फैसले के बाद अकेले राजस्थान के पांच लाख लीटर प्रतिदिन ऊंटनी के दूध को बाजार मुहैया हो सकेगा। अभी तक ये दूध ऊंटनी के बच्चे पी रहे थे या गांव में दवा के रूप में काम आ रहा था लेकिन अब इसे संगठित बाजार मिल सकेगा।
ऊंट पालक राईका समुदाय को मिलेगा फायदा
2003 से राष्ट्रीय उष्ट्र एवं अनुसंधान केन्द्र इसके लिए प्रयासरत था। एक जून से दो प्रतिशत स्टैंडर्ड फैट के आधार पर दूध बेचने की परमीशन मिल गई। बाजार में अब कोई एजेंसी ऊंटनी के दूध कोे चैलेंज नहीं कर सकेगी। इससे ऊंट पालकों की टेंशन तो कम हुई ही है साथ ही दुग्ध व्यापारियाें के लिए भी व्यापार का रास्ता भी खुल गया है। ऊंट पालक राईका/ रेबारी जाति के लिए यह एक बहुत बड़ी समस्या थी, ऊंटनी के दूध की बाजार में मांग कम साथ ही, डेयरी वाले दूध खरीदने में कतराते थे, अब इस समुदाय को सीधा फायदा होगा।गुणवत्ता के आधार पर अब ऊंटनी के दूध को कोई चेलैंज नहीं कर पायेगा
दरअसल मानक तय करने वाली संस्था पहले ऊंटनी के दूध की फैट 3.4 प्रतिशत और फैट रहित 6.5 प्रतिशत के आधार पर बेचने की छूट दी हुई थी लेकिन अधिकांश ऊंटनियों के दूध में फैट प्रतिशत दो से तीन प्रतिशत ही रही। इस वजह से हर जगह ऊंटनी के दूध की गुणवत्ता को चैलेंज किया जाता रहा है। इसके बाद अब देशभर में ऊंटनी के दूध को बेचने के लिए फैट के आधार पर चैलेंज नहीं किया जा सकेगा।
राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र संस्था के आवेदन को किया स्वीकार
बाजार में उठ रहे सवालों पर विराम लगाने के लिए लिहाज से 14 साल से राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र संस्था से फैट दर रिवाइज करने के लिए आवेदन कर रहा था। एक सप्ताह पूर्व संस्था ने ऊंटनी के दूध की फैट दर को रिवाइज करते हुए दो प्रतिशत फैट और छह प्रतिशत फैट रहित दूध के आधार पर मार्केट में दूध बेचने की अनुमति दे दी है। ऊंटनी के दूध के मामले में ये एनआरसीसी को बड़ी सफलता मिली है। अब ऊंटपालक स्वयं या किसी ठेकेदार, कंपनी के मार्फत दूध मंडी में ऊंटनी के दूध को बेच सकता है।


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