Wednesday, March 6, 2019

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है By Tejaram Dewasi



कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है






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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है
समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता
भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा।

Tuesday, March 5, 2019

राजस्थान मंत्रिमंडल में शामिल सभी मंत्रियों की कुण्डली

            INCREDIBLE NEWINDIA      


         राजस्थान मंत्रिमंडल और मंत्रियों के विभाग






1. अशोक गहलोत , मुख्यमंत्री :
वित्त, आबकारी, आयोजना, नीति आयोजन, कार्मिक, सामान्य प्रशासन, राजस्थान राज्य अन्वेषण ब्यूरो, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग, गृह मामलात और न्याय विभाग।

2. सचिन पायलट, उपमुख्यमंत्री :
सार्वजनिक निर्माण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, विज्ञान व प्रौद्योगिकी और सांख्यिकी।

कैबिनेट मंत्री

3. बीडी कल्ला : ऊर्जा, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, भू-जल, कला, साहित्य, संस्कृति और पुरातत्व

4. शांति कुमार धारीवाल : स्वायत्त शासन, नगरीय विकास एवं आवासन, विधि एवं विधिक कार्य और विधि परामर्शी कार्यालय, संसदीय मामलात

5. परसादी लाल : उद्योग और राजकीय उपक्रम

6. मास्टर भंवरलाल मेघवाल : सामाजिक न्याय—अधिकारिता, आपदा प्रबंधन एवं सहायता

7. लालचंद कटारिया : कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य

8. रघु शर्मा : चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं (ईएसआई) और सूचना व जनसंपर्क

9. प्रमोद भाया : खान, गोपालन

10. विश्वेंद्र सिंह : पर्यटन, देवस्थान

11. हरीश चौधरी : राजस्व, उपनिवेशन, कृषि सिंचित क्षेत्रीय विकास एवं जल उपयोगिता

12. रमेश चंद मीणा : खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले

13. उदयलाल आंजना : सहकारिता, इंदिरा गांधी नहर परियोजना

14. प्रताप सिंह खाचरियावास : परिवहन, सैनिक कल्याण

15. सालेह मोहम्मद : अल्पसंख्यक मामलात, वक्फ और जन अभियोग निराकरण

राज्य मंत्री

16. गोविंद सिंह डोटासरा : शिक्षा—प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार), पर्यटन, देवस्थान

17. ममता भूपेश : महिला एवं बाल विकास (स्वतंत्र प्रभार), जनअभियोग निराकरण, अल्पसंख्यक मामलात, वक्फ

18. अर्जुन सिंह बामनिया : जनजाति क्षेत्रीय विकास (स्वतंत्र प्रभार), उद्योग राजकीय उपक्रम

19. भंवर सिंह भाटी : उच्च शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार), राजस्व उपनिवेशन कृषि सिंचित क्षेत्रीय विकास एवं जल उपयोगिता

20. सुखराम विश्नोई : वन विभाग (स्वतंत्र प्रभार), पर्यावरण विभाग (स्वतंत्र प्रभार), खाद्य-नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले

21. अशोक चांदना : युवा मामले-खेल (स्वतंत्र प्रभार), कौशल-नियोजन व उद्यमिता (स्वतंत्र प्रभार), परिवहन, सैनिक कल्याण

22.टीकाराम जूली : श्रम विभाग (स्वतंत्र प्रभार), कारखाना एवं बॉयलर्स निरीक्षण (स्वतंत्र प्रभार), सहकारिता, इंदिरा गांधी नहर परियोजना  
23.भजनलाल जाटव : गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार), मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग (स्वतंत्र प्रभार), कृषि, पशुपालन और मत्स्य विभाग  
24.राजेंद्र सिंह यादव : आयोजना (जनशक्ति) विभाग (स्वतंत्र प्रभार), स्टेट मोटर गैराज विभाग (स्वतंत्र प्रभार) भाषा विभाग (स्वतंत्र प्रभार), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और आपदा प्रबंधन एवं सहायता  
25.डॉ. सुभाष गर्ग : तकनीकी शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार), संस्कृत शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, आयुर्वेद व भारतीय चिकित्सा, ईएसआई, सूचना एवं जनसंपर्क।

Monday, March 4, 2019

आखिर क्यों मनाई जाती है हर साल महाशिवरात्रि, जानिए ये कथाएं

संपादक- तेजाराम देवासी  Incrediblenewindia.com                              
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आखिर क्यों मनाई जाती है हर साल महाशिवरात्रि, जानिए ये कथाएं

हर साल भारत में महाशिवरात्रि बड़े धूम-धाम से मनाई जाती है। सभी भक्त भगवान शिव को फल-फूल अर्पित करते है और शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करते है। इस दिन भक्त भांग भी पीते है। लेकिन क्या आप जानते है कि शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है। आज हम आपको शिवरात्रि मनाने के कुछ पौराणिक कथाऐं बताएंगे -

महाशिवरात्रि मनाएं जाने के संबंध में पुराणों में कई कथाएं प्रचलित हैं। भागवत पुराण के अनुसार समुंद्र मंथन के समय वासुकि नाग के मुख में भयंकर विष की ज्वालाएं उठी और वे समुद्र के जल में मिश्रित हो विष के रूप में प्रकट हो गई। विष की यह ज्वालाएं संपूर्ण आकाश में फैलकर समस्त चराचर जगत को जलाने लगी। इस भीषण स्थिति से घबरा देव, ऋषि, मुनि भगवान शिव के पास गए तथा भीषण तम स्थिति से बचाने का अनुरोध किया तथा प्रार्थना की कि हे प्रभु इस संकट से बचाइए।
भगवान शिव तो आशुतोष और दानी है। वे तुरंत प्रसन्न हुए तथा तत्काल उस विष को पीकर अपनी योग शक्ति के उसे कंठ में धारण कर लिया तभी से भगवान शिव नीलकंठ कहलाए। उसी समय समुद्र के जल से चंद्र अपनी अमृत किरणों के साथ प्रकट हुए। देवता के अनुरोध पर उस विष की शांति के लिए भगवान शिव ने अपनी ललाट पर चंद्रमा को धारण कर लिया। तब से उनका नाम चंद्रशेखर पड़ा। शिव द्वारा इस महान विपदा को झेलने तथा गरल विष की शांति हेतु उस चंद्रमा की चांदनी में सभी देवों में रात्रि भर शिव की महिमा का गुणगान किया। वह महान रात्रि ही तब से शिवरात्रि के नाम से जानी गई।
लिंग पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्णु दोनों में भी इस बात का विवाद हो गया कि कौन बड़ा है। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि दोनों ही महान महाशक्तियों ने अपनी दिव्य अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग शुरू कर युद्ध घोषित कर दिया। चारों ओर हाहाकार मच गया देवताओं, ऋषि मुनियों के अनुरोध पर भगवान शिव इस विवाद को शांत करने के लिए ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए। यह लिंग ज्वालामय प्रतीत हो रहा था तथा इसका ना आदि था और नहीं अंत।
ब्रह्मा विष्णु दोनों ही इस लिंग को देख कर यह समझे नहीं कि यह क्या वस्तु है। विष्णु भगवान सूकर का रूप धारण कर नीचे की ओर उतरे तथा ब्रह्मा हंस का रूप धारण कर ऊपर की और यह जानने के लिए उडे कि इस लिंग का आरंभ हुआ अंत कहां है। दोनों को ही सफलता नहीं मिली, तब दोनों ने ही ज्योतिर्लिंग को प्रणाम किया। उस समय ज्योतिर्लिंग से ओम ॐ की ध्वनि सुनाई दी। ब्रह्मा विष्णु दोनों आश्चर्यचकित हो गए।
तब देखा कि लिंग के दाहिने और अकार, बांयी ओर उकार और बीच में मकार है। अकार सूर्यमंडल की तरह, उकार अग्नि की तरह तथा मकार चंद्रमा की तरह चमक रहा था और उन तीन कार्यों पर शुद्ध स्फटिक की तरह भगवान शिव को देखा। इस अदभुत दृश्य को देख ब्रह्मा और विष्णु अति प्रसन्न हो शिव की स्तुति करने लगे। शिव ने प्रसन्न हो दोनों को अचल भक्ति का वरदान दिया। प्रथम बार शिव को ज्योतिर्लिंग में प्रकट होने पर इसे शिवरात्रि के रूप में मनाया गया।
कथाएं जो भी है, सच्चाई इस बात की है कि विकट घड़ी में भगवान शिव ने चाहे विषपान से संबंधित समस्या थी या दो महाशक्तियों के युद्ध अशांति की समस्या, भगवान शिव ने साहस, पूर्वक धैर्यपूर्वक जगत के कल्याण हेतु कुशल आपदा प्रबंध किया इस हेतु शिवरात्रि को लोककल्याण उदारता ओर धैर्यता का प्रतीक माना जाता है।

Saturday, March 2, 2019

आतंकवाद की समस्या एवं समाधान


                  Terrorism Essay in Hindi आतंकवाद को हम इस तरह परिभाषित कर सकते है की आतंकवाद कुछ लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हिंसा का प्रयोग करते है| यह युद्ध और निति से पूरी तरह अलग है| आतंकवाद कुछ वर्षों से बढ़ते ही जा रहा है और सबसे ज्यादा आतंकवाद से पीड़ित भारत है और इसका मुख्य कारण पाकिस्तान है| आतंकवाद के उपर  बच्चों को आमतौर पर हर कक्षाओं मे एस्से दिया  जाता है तो चलिए अब नीचे लिखे एस्से को पढ़ते है|

Terrorism Essay in Hindi 100 Words

आज आतंकवाद एक ऐसी वैश्विक समस्या का रुप धारण कर चुका है, जिसकी आग में सारा विश्व जल रहा है| आज कोई भी देश यह दावा नहीं कर सकता कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नहीं है और वह आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त है| सच तो यह है कि आज यह कोई नहीं जानता कि आतंकवाद का अगला निशाना कौन और किस रूप में होगा| हिंसा के द्वारा जनमानस में भय या आतंकवाद पैदा कर उद्देश्यों को पूरा करना ही आतंकवाद कहलाता है| यह उद्देश्य राजनीतिक, धार्मिक या आर्थिक ही नहीं, सामाजिक या अन्य किसी प्रकार का भी हो सकता है|
आतंकवाद पर निबंध - Terrorism Essay in Hindi Language
आतंकवाद पर निबंध – Terrorism Essay in Hindi Language

Terrorism Essay in Hindi 200 Words

वैसे तो आतंकवाद के कई प्रकार है, किंतु इन में से तीन ऐसे हैं जिनसे पूरी दुनिया त्रस्त है राजनीतिक आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता, एवं गैर-राजनीतिक या समाजिक आतंकवाद| श्रीलंका में लिट्टे समर्थकों एवं अफगानिस्तान में तालिबान संगठनों की गतिविधियां राजनीतिक आतंकवाद के उदाहरण है|
जम्मू कश्मीर में अलगाववादी गुटों द्वारा किए गए अपराधिक कृत्य भी राजनीतिक आतंकवाद के ही उदाहरण है| अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन धार्मिक कट्टरता की भावना से अपराधिक कृत्यों को अंजाम देते है| ऐसे आतंकवाद को धार्मिक कट्टरता की श्रेणी में रखा जाता है| अपनी सामाजिक स्थिति या अन्य कारणों से उत्पन्न समाजिक क्रांतिकारी विद्रोह को गैर-राजनीतिक श्रेणी में रखा जाता है| भारत में नक्सलवाद गैर-राजनीतिक आतंकवाद का उदाहरण है|
आतंकवादी हमेशा आतंक फैलाने के नए-नए तरीके आजमाते रहते हैं| भीड़ भरे स्थानों, रेल बसों इत्यादि में बम विस्फोटक करना, रेलवे दुर्घटना करवाने के लिए रेलवे लाइनों की पटरियां उखाड़ देना, वायुयानों का अपहरण कर लेना निर्दोष लोगों या राजनीतिज्ञों को बंदी बना लेना, बैंक डकैती करना इत्यादि कुछ ऐसी आतंकवादी गतिविधियां हैं जिनमें पूरा विश्व पिछले कुछ दशकों से त्रस्त हैं| आज लगभग पूरा विश्व आतंकवाद की चपेट में है और किसी न किसी तरह से पीड़ित है |

Terrorism Essay in Hindi 300 Words

पिछले एक दशक में पूरे विश्व में आतंकवादी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है| 11 सितंबर 2001 को अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुआ आतंकी हमला आतंकवाद के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है| वैसे तो आज लगभग पूरा विश्व ही आतंकवाद की चपेट में है किंतु भारत दुनियाभर में आतंकवाद से सार्वधिक त्रस्त देशों में से एक है| इसका प्रमुख कारण भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान है| भारत और पाकिस्तान में आरंभ से ही जम्मू कश्मीर राज्य विवाद का मुद्दा रहा और दोनों ही देश इस पर अपना अधिकार करना चाहते हैं| पाकिस्तान कश्मीर को हथियाने के लिए अब तक 3 बड़े युद्ध कर चुका है और आए दिन सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करता रहता है, लेकिन अभी तक उसके हाथ असफलता ही लगी है इसलिए उसने भारत को आंतरिक रुप से नुकसान पहुंचाने के लिए आतंकवाद का सहारा लेना शुरू कर दिया है|
जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे और पाकिस्तानी घुसपैठ को रोकते हुए इस राज्य पर अपनी प्रशासनिक पकड़ मजबूत करनी होगी तथा आवश्यकता पड़ने पर पाकिस्तानी से द्विपक्षीय वार्ता के अतिरिक्त उसे प्रति कठोर कदम उठाने के लिए भी तैयार रहना होगा| इसका नतीजा यह निकला है कि यदा-कदा भारत आतंकी हमलों का निशाना बनता रहता है| 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट, 13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हुआ हमला, 7 मार्च 2006 को हुआ  वाराणसी बम धमाका, 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में हुआ बम विस्फोटक, 26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल पर हमला आदि कुछ ऐसी घटनाएं हैं जो भारत को आतंकवाद पीड़ित देश घोषित करती है| इन बड़ी घटनाओं के अतिरिक्त आतंकवादी भारत में अनेक छोटी मोटी घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं|
Terrorism Essay in Hindi Aatankwad Ki Samasya
आतंकवाद पर निबंध – Terrorism Essay in Hindi (Aatankwad Ki Samasya)

Terrorism Essay in Hindi 400 Words

भारत में नक्सलवाद भी अब आतंकवाद का रूप ले चुका है| पहले नक्सलवाद का उद्येश्य अपने वास्तविक हक की लड़ाई थी किंतु अब यह बहुत ही हिंसक विद्रोह के रूप में देश के लिए एक गंभीर समस्या एवं चुनौती बन चुका है| प्रारंभ में यह विद्रोह पश्चिम बंगाल तक सीमित था किंतु धीरे-धीरे यह है उड़ीसा, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ क्षेत्रों में भी फैलता गया| वैसे तो आतंकवाद के प्रमुख कारण राजनीतिक स्वार्थ, सत्ता एवं धार्मिक कट्टरता है किंतु नक्सलवाद जैसे विद्रोही गतिविधियों के सामाजिक कारण भी हैं जिनमें बेरोजगारी एवं गरीबी प्रमुख है विश्व के अधिकतर आतंकवादी संगठन युवाओं की गरीबी एवं बेरोजगारी का लाभ उठा कर ही उन्हें आतंकवाद के अंधे कुएं में कूदने के लिए उकसाने में सफल रहते हैं और बेरोजगार युवा इस काम को करने के लिए तैयार भी हो जाते हैं|
आतंकवाद के संदर्भ में सार्वधिक बुरी बात यह है कि कोई नहीं जानता कि आतंकवादियों का अगला निशाना कौन होगा? इसलिए आतंकवाद नेआज लोगों के जीवन को असुरक्षित बना दिया है और यह मानव जाति के लिए कलंक बन चुका है| आतंकवाद की समस्या का सही समाधान यही हो सकता है कि जिन कारणों से इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है हमें उन्हें दूर करना चाहिए| भारत में कुछ इलाकों में लोग अपने हक के लिए भी नक्सलवाद का सहारा लेते हैं ऐसे इलाकों की पहचान करके उन्हें उन का अधिकार प्रदान कराना अधिक आवश्यक होगा ताकि वह आतंकवाद से दूर रहें|
पाकिस्तान कश्मीर को अपना राज्य बनाने के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देता है और वह पाकिस्तान में आतंकवादियों को ट्रेनिंग भी देता है ताकि भारत में हमला करते रहे हाल ही में पाकिस्तान के आतंकवादियों ने पठानकोट में हमला किया, उरी अटैक किया, नगरोटा अटैक, कभी बारामुला अटैक किया वह अपनी गतिविधियों को अंजाम देते ही रहता है ताकि किसी भी तरह वह कश्मीर को भारत से लग कर दें| पाकिस्तान ने इन सारी घटनाओं को अंजाम दिया फिर भारत के प्रधानमंत्री ने इसका जवाब दिया और पाकिस्तान में एक सर्जिकल स्ट्राइक कर दी| सर्जिकल स्ट्राइक करने के बावजूद भी पाकिस्तान अब भी आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और कश्मीर को भारत से अलग करने की सोचता रहता है|
आतंकवाद की समस्या के समाधान के लिए पूरे विश्व को मिलकर एक व्यापक रणनीति बनानी होगी| आतंकवाद आज वैश्विक समस्या का रूप ले चुका है इसलिए इसका संपूर्ण समाधान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं प्रयासों से ही संभव हो पाएगा| इसमें संयुक्त राष्ट्रीय संघ, इंटरपोल एवं अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय को भी अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी और आतंकवाद की समस्या को हमें जड़ से खत्म करना होगा|
Note :- अगर आपको हमारा द्वारा लिखा हुआ Terrorism Essay in Hindi मे एस्से पसंद आया तो इसको आप जरूर शेयर करे ताकि और लोगो की भी हेल्प हो जाये जो Terrorism Essay in Hindi का एस्से ढूंढ रहे हो|

Sunday, February 24, 2019

ज़िन्दगी जिन्दादिली का नाम है



By Tejaram Dewasi  
ज़िन्दगी जिन्दादिली का नाम है आखिर क्या है यह ज़िन्दगी |जब कभी सोचती हूँ ज़िन्दगी के बारे में तो ऐसा लगता है जैसे उगते सूरज की पहली किरण ,जिसे देख कर हमारे अंदर एक नई आशा और विश्वास का संचार होता है | ऐसी खुशी दिल में महसूस होती है ज़िन्दगी हमें कई reason देती है कभी ख़ुशी देती है तो कभी दुःख देती है पर यह हम पर depend करता है कि हम उस दुःख को कैसे ख़ुशी में बदल दे |क्योंकि इस दुनिया में हमसे भी ज्यादा दुखी लोग है जब हम उनकी तरफ देखते है तो हमें अपना दुःख कम लगने लगता है इससे हमें शक्ति मिलती है और वैसे भी उतार चढाव का नाम ही ज़िन्दगी है |और जब दुःख के बाद सुख आता है तभी तो हमें वास्तव में ख़ुशी का अहसास होता है ज़िन्दगी हर किसी के लिए अलग ही पहेली होती है सभी इसे अपने तरीके से जीना पसंद करते है किसी के लिए ज़िन्दगी बहुत ही खुबसूरत है रंगों से भरी तो किसी के लिए संघर्ष ही ज़िन्दगी का दूसरा नाम है|
 ज़िन्दगी के लिए हमारी सोच सकारत्मक होनी चाहिए यदि राह में बहुत सी रूकावटे है किन्तु यदि आपका attitude positive है तो आप ज़िन्दगी को जीत लेंगे |हमें ज़िन्दगी से निराश नहीं होना चाहिए जिस तरह मकड़ी हज़ार बार गिरती है पर फिर उठती है अपना जाल बनाने के लिए पर हार नहीं मानती है तो  हम क्यों?बस बात धेर्य की  है क्योंकि जब हमारे favour में result नहीं मिलता है तो हम मायूस हो जाते है पर मेहनत का फल देर सबेर मिलता है | हमें ज़िन्दगी में अपने आप के साथ ईमानदार होना चाहिए | ईमानदारी जीवन की सबसे अच्छी policy होती है | ज़िन्दगी को समझना बेहद जरुरी है क्योंकि ज़िन्दगी हमें कुछ न कुछ सिखाती है ये तो हम पर depend करता है हम उसे enjoy करते है या फिर problem समझ कर रोना रोते रहे |ज़िन्दगी का सच्चा सुख हमें तभी मिलता है जब हमारी ज़िन्दगी किसी के काम आये जब हम किसी की मदद करते है तब जो सन्तोष मिलता है वो करोड़ों रूपए कमाने से भी नहीं मिलता है | जीवन में सन्तोष होना बहुत जरुरी है |पर हम भाग दौड़ में लगे हुए जो हमारे पास है उससे देख ही नहीं पा रहे है  मन की ख़ुशी बहुत मायने रखती है जो बाहर कहीं नहीं मिलती है जब हमारी वजह से किसी के होठो पर मुस्कान आती है दिल को राहत मिलती है मैं यह नहीं कहती कि महत्वकान्क्षी मत बनो पर जिंदगी की कीमत पर नहीं | किसी ने सच ही कहा है कि हर इंसान का एक लक्ष्य होता है लक्ष्यहीन ज़िन्दगी बेमानी सी  लगती है | आखिर ज़िन्दगी की उडान सपनो से ही तो शुरु होती है | सबसे जरुरी बात तो यह है कि ज़िन्दगी का हर पल हर लम्हा enjoy करना चाहिए |क्योंकि कल क्या हो किसने देखा अपने आज को जी भर जी लो | हमेशा लोग भविष्य के सपने देखते है और अपने आज पर ध्यान नहीं देते है | अपने आज को संवारो कल अपने आप सुनेहरा होगा | ज़िन्दगी को ख़ुशी से जियो |हमेशा मुस्कुराते रहो क्योंकि ज़िन्दगी ईश्वर का अनमोल तोहफा है please ज़िन्दगी से प्यार करो इसे सहेज कर रखो |



Friday, February 22, 2019

आईएएस के इंटरव्यू में फेल होने वालों को मिलेगी दूसरी सरकारी नौकरी!

आईएएस के इंटरव्यू में फेल होने वालों को मिलेगी दूसरी सरकारी नौकरी!

22th Feb 2019
UPSC के चेयरमैन अरविंद सक्सेना
भारत में आईएएस की परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। हर साल लाखों की संख्या में युवा इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन उनमें से महज कुछ का ही सेलेक्शन होता है। मुश्किल माने जानी वाली इस परीक्षा में कई उम्मीदवार ऐसे होते हैं जो इंटरव्यू तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन अंतिम लिस्ट में जगह नहीं बना पाते। ऐसे छात्रों के लिए एक अच्छी खबर है।

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने केंद्र सरकार और उसके मंत्रालयों को सिविल सेवा परीक्षा के साक्षात्कार के चरण में पहुंचकर अंतिम लिस्ट में जगह न बना पाने वाले उम्मीदवारों की भर्ती करने की सिफारिश की है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यूपीएससी के अध्यक्ष अरविंद सक्सेना ने कहा, "हमने केंद्र सरकार और मंत्रालयों को ऐसे लोगों की भर्ती करने का प्रस्ताव दिया है, जो सिविल सेवा और अन्य परीक्षाओं में साक्षात्कार तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन अंतिम रूप में चयनित होने में विफल रहते हैं।" 

यूपीएससी के चेयरमैन अरविंद सक्सेना राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों के तेईसवें राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर ओडिशा में यह बातें कहीं। हर साल, लगभग 11 लाख उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। इनमें से आधे उम्मीदवार ही प्री एग्जाम में बैठते हैं। परीक्षा चरणों के माध्यम से उनकी संख्या कम हो जाती है और अंततः केवल 600 उम्मीदवारों का चयन किया जाता है।

सरकार मुश्किल चयन प्रक्रिया से गुजरने वाले उम्मीदवारों की लिस्ट से दूसरे मंत्रालयों में भर्ती पर विचार कर सकती है। सक्सेना ने कहा कि इससे युवाओं में परीक्षा के तनाव को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि 2018 में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी ने ऐसे उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए विज्ञापन जारी किया है जो इंटरव्यू में असफल हो जाएंगे। सिविल सर्विस के 2018 का इंटरव्यू फिलहाल जारी है और कुछ ही दिनों में परिणाम आने की संभावना है।

अरविंद सक्सेना ने यह भी कहा कि यूपीएससी परीक्षा प्रक्रिया को अधिक उम्मीदवार के अनुकूल बनाने के लिए कदम उठा रहा है। अब ऑनलाइन आवेदन करने के बाद उम्मीदवारों को एक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा जिसके जरिए बाद में अगर वे चाहेंगे तो अपना आवेदन वापस ले सकेंगे।
दरअसलपीएससी का कहना है कि आधे उम्मीदवार फॉर्म तो भर देते हैं, लेकिन प्री एग्जाम देने ही नहीं आते हैं। ऐसे में यूपीएससी को परीक्षा केंद्र और पेपर पर अधिक पैसे खर्च करने पड़ते हैं। सक्सेना ने कहा कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य उम्मीदवारों को जागरूक करना है कि यदि वे अच्छी तरह से तैयार नहीं हैं, तो उन्हें परीक्षा नहीं देनी चाहिए और अगले साल इसके लिए कोशिश करनी चाहिए। परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए UPSC कई अन्य उपाय भी कर रहा है, जिनमें ऑनलाइन कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट आयोजित कराने पर विचार किया जा रहा है।

Tuesday, January 29, 2019

भारत का विदेशी कर्ज

भारत सरकार के प्राप्ति बजट 2018-19 एवं ऋण की स्थिति जानने के लिए यहां पर क्लिक करें।       

          भारत का विदेशी कर्ज 2.8 फीसदी घटकर $ 514.4 अरब डॉलर पर: आरबीआई

By incrediblenewIndia

नई दिल्ली. वाणिज्यिक कर्ज, अल्पावधि कर्ज और अनिवासी भारतीय (एनआरआई) की जमा राशि में कमी आने से जून तिमाही में देश का कुल बाहरी कर्ज पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही की तुलना में 2.8 फीसदी कम होकर 514.40 अरब डॉलर रह गया. रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. 

आंकड़ों के अनुसार देश का कुल बाहरी कर्ज मार्च तिमाही के स्तर से 14.9 अरब डॉलर कम होकर जून तिमाही में 514.4 अरब डॉलर रह गया. जून तिमाही अंत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुकाबले बाहरी कर्ज अनुपात 20.4 फीसदी पर आ गया. मार्च तिमाही अंत तक यह अनुपात 20.5 फीसदी था. 

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इसके बाद एनआरआई जमा 24.2 फीसदी और अल्पावधि व्यापार ऋण 18.8 फीसदी पर रहा है. जून 2018 के अंत तक दीर्घावधि ऋण (एक साल से अधिक की परिपक्वता अवधि वाले ऋण) मार्च तिमाही की तुलना में 11.4 अरब डॉलर कम होकर 415.70 अरब डॉलर पर आ गया है. 

आरबीआई के मुताबिक, विदेशी मुद्रा के संदर्भ में अमेरिकी डॉलर से प्रभावी ऋण जून 2018 के अंत तक देश के कुल बाह्य कर्ज में सर्वाधिक 50.1 फीसदी का हिस्सेदार रहा है. इसके बाद भारतीय रुपया 35.4 फीसदी, एसडीआर 5.4 फीसदी, जापानी येन 4.7 फीसदी और यूरो 3.3 फीसदी का स्थान रहा है. 

अंधविश्‍वासी समाज

             भारत हमेशा से अंधविश्‍वासी लोगों की भूमि रही है। हर धर्म, हर संस्‍कृति और समुदाय में लोगों ने अलग-अलग अंधविश्‍वासों को जगह द...