Saturday, December 1, 2018

न्यू नेशनल पेंशन स्कीम महत्वपूर्ण जानकारी |


न्यू नेशनल पेंशन स्कीम महत्वपूर्ण जानकारी | National New Pension Scheme NPS in Hindi 






न्यू नेशनल पेंशन स्कीम National New Pension Scheme NPS in Hindi

न्यू नेशनल पेंशन स्कीम यह एक जरुरी जानकारी हैं इसे पढ़े एवम अपने साथ अपने दोस्तों एवम रिश्तेदारों को इस तरह की योजनाओ के बारे में जानकारी दे ताकि सभी अपने भविष्य के लिए आज से तैयारी कर सके |
न्यू नेशनल पेंशन स्कीम वृद्धावस्था में आर्थिक सहायता देती हैं | जीवन का वह समय जब मनुष्य परिश्रम करके धन का उपार्जन नहीं कर सकता,उस समय न्यू पेंशन स्कीम उसकी लाठी बनती हैं | इस तरह के प्लान यह बताते हैं कि भविष्य में मनुष्य को पेंशन स्कीम के चलते कभी भी अपने जीवन में आर्थिक समझौता नहीं करना होगा | पर इस सबके लिए हमें वर्तमान समय में जागना होगा और भविष्य के प्रति चिंता करते हुए न्यू पेंशन स्कीम से जुड़ना होगा जिसके लिए आपको समय रहते कुछ इन्वेस्ट करना होगा जो आपको वृद्धावस्था में लाभ दे |
National New Pension Scheme NPS in Hindi

National New Pension Scheme NPS

क्या हैं न्यू नेशनल पेंशन स्कीम (What Is National New Pension Scheme NPS)

सामान्यतह भारत में रिटायर्मेंट की आयु 60 से 65 वर्ष हैं लेकिन भविष्य में इसे बढ़ाकर 75 कर देने की आशंका हैं | अधिक से अधिक वृद्ध व्यक्तियों को आर्थिक सुरक्षा मिले इसलिए सरकार द्वारा National Pension Scheme NPS चालू किया गया हैं |

History Of National New Pension Scheme NPS

सरकार द्वारा 10 अक्टूबर 2003 में पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (Pension Fund Regulatory & Development Authority की स्थापना की | जिसने वर्ष 1 जनवरी 2004 में National Pension Scheme (NPS) लॉन्च किया जिसका मुख्य उद्देश्य रिटायर्ड व्यक्तियों के लिए रिटायरमेंट इनकम प्रोवाइड कराना हैं |साथ ही नागरिको को भविष्य के प्रति जागरूक करना और बचत के लिए प्रोत्साहित करना भी PFRDA का काम हैं |
National Pension Scheme NPS ने 1st मई 2009 में सफलता पूर्वक पेंशन का कार्य शुरू किया जिसमे अनओर्गेनाइज़ सेक्टर के लोगो को भी शामिल किया गया | इसके पहले पेंशन केवल सरकारी कर्मचारी को मिलती थी जो कि सरकार द्वारा दी  जाती थी लेकिन 2003 के बाद जो लोग सरकारी नौकरी में लगे उन्हें सरकार द्वारा दी जाने वाली पेंशन बंद कर दी गई | और उन्हें NPS के तहत पेंशन देने का प्रावधान लाया गया | जिसमे वे खुद अपने योगदान द्वारा पेंशन बना सकते हैं साथ ही अन्य गैर सरकारी नौकरियों में लगे लोगो को भी NPS में शामिल किया गया |

What Is PRAN Card In NPS

NPS के तहत सब्सक्राइबर को PRAN Card प्रोवाइड कराया जाता हैं :NPS के तहत सब्सक्राइबर को खाते को नियमित रूप से संचालित करने हेतु a unique Permanent Retirement Account Number अर्थात PRAN नंबर दिया जाता हैं जो अद्वितीय होता हैं और एक सब्सक्राइबर द्वारा बदला नहीं जा सकता |यह उम्र भर समान होता हैं और पुरे देश में चलता हैं |
NPS के तहत दो तरह के अकाउंट खोले जाते हैं |
टियर 1 : यह नॉन विड्रावल सेविंग अकाउंट हैं जहाँ से 60 वर्ष की आयु के बाद ही पैसा मिलता हैं |
टियर 2 : यह एक साधारण सेविंग अकाउंट की तरह हैं जहाँ से सब्सक्राइबर पैसा निकाल सकता हैं | अतः इस पर कर लाभ नहीं मिलता |

जाने विस्तार से What Is Tier I And Tier II in NPS

क्रबिंदुटियर Iटियर II
1परिभाषाइससे सब्सक्राइबर पैसा नहीं निकाल सकता हैं | यहाँ भविष्य के लिए पैसा जमा होता हैं |यहाँ से सब्सक्राइबर पैसा निकाल सकता हैं |
2अकाउंट खोलने के लिए न्यूनतम धन राशि500 रूपए1000 रूपए
3न्यूनतम मासिक योगदान500 रूपये250 रूपये
4न्यूनतम वार्षिक योगदान6000 रूपये2000 रुपये
5योगदान का समयइसमें सब्सक्राइबर को 60 वर्ष की आयु तक योगदान करना अनिवार्य हैं |यह सब्सक्राइबर पर निर्भर करता हैं |
6टैक्स लाभyesno

नेशनल पेंशन स्कीम के मुख्य बिंदु (Key Point For National New Pension Scheme NPS)
  • नेशनल पेंशन स्कीम के लिए योग्यता :

Eligibility For NPS
  1. केंद्रीय सरकारी कर्मचारी :
आर्मी ऑफिसर्स के अलावा सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारी NPS से जुड़ सकते हैं | इसके अलावा अन्य सरकारी कर्मचारी भी आल सिटिज़न मॉडल के तहत पेंशन सुविधा से जुड़ सकते हैं |
  • NPS से जुड़ने का तरीका :
केन्द्रीय ऑफिसर्स इस योजना के तहत टियर 1 में पेंशन का लाभ ले सकते हैं |
  • योगदान :
केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के लिए NPS अनिवार्य हैं |जिसके लिए प्रति माह 10 % उनकी सैलरी से कटता हैं और उतना ही योगदान सरकार द्वारा दिया जाता हैं |
  • विड्रावल :
सब्सक्राइबर को रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती हैं | रिटायरमेंट के बाद वो टियर 1 के तहत पैसा निकाल सकता हैं | अगर सब्सक्राइबर की मृत्यु हो जाए तो सारा पैसा नॉमिनी को दिया जाता हैं |
  1. राज्य सरकार कर्मचारी :
किसी भी राज्य के सरकारी कर्मचारी भी इस NPS योजना से जुड़ सकते हैं जिसके लिए उन्हें राज्य सरकार के नोटिस की जरुरत होती हैं |अन्य सरकारी कर्मचारी जो इस NPS प्रणाली के अंतर्गत नहीं आते वे भी Point of Presence – Service Provider (POP-SP) के जरिये आल सिटिज़न मॉडल के तहत पेंशन का लाभ ले सकते हैं |


  • NPS से जुड़ने का तरीका :
NPS से जुड़ने के लिए राज्य सरकार के सरकारी कर्मचारी को एक फॉर्म भरकर DDO के हस्ताक्षर लेने पड़ते हैं |
  • योगदान :
जिसके लिए प्रति माह 10 % उनके मासिक वेतन से कटता हैं और उतना ही योगदान सरकार द्वारा दिया जाता हैं |
  • विड्रावल :
NPS के तहत सब्सक्राइबर को रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती हैं अगर सब्सक्राइबर की मृत्यु हो जाये तो पूरा पैसा नॉमिनी को मिल जाता हैं |
  1. कॉर्पोरेट :
कॉर्पोरेट स्वतंत्ररूप से कॉर्पोरेट लेवल अथवा सब्सक्राइबर लेवल के अंतर्गत NPS के तहत जुड़ सकते हैं |यह आल सिटिज़न मॉडल के तहत किसी भी योजना में शामिल हो सकते हैं |
  1. असंगठित क्षेत्र के श्रमिक :
अन्य व्यक्ति भी NPS का हिस्सा बन सकते हैं इसके लिए 2015 के पहले स्वालंबन योजना का प्रावधान था लेकिन अब इसकी जगह अटल पेंशन योजना ने ले ली हैं |इसके लिए नागरिक की उम्र 18 वर्ष से 40 वर्ष की होनी चाहिये |विस्तार से जानने के लिए अटल पेंशन योजना Atal Pension Yojana APY पर क्लिक करे |
न्यू पेंशन स्कीम के लाभ (Benefits NPS)
  • पारदर्शिता :
NPS एक लाभकारी पेंशन स्कीम हैं इसमें इन्वेस्ट करना लाभकारी हैं इसमें सभी कार्यो में पारदर्शिता बनी रहती हैं |पारदर्शिता मतलब इससे जुड़े लोग कभी भी निवेश एवम लाभ का ब्यौरा ले सकते हैं |
  • आसान प्रक्रिया :
NPS के रुल बहुत आसानी से समझे जा सकते हैं यह अन्य इनवेस्टमेंट की तरह कॉमप्लीकेटेड नहीं हैं | इसमें एक Permanent Retirement Account Number (PRAN) दिया जाता हैं जिसके जरिये आसानी से इसे इस NPS से जुड़ा जा सकता हैं |
  • पोर्टेबल स्कीम:
यह NPS की प्रक्रिया सुगम एवम सुचारू हैं | इसमें मिले प्रान नंबर के कारण सभी क्रियाये आसान एवम छोटी हो जाती हैं | यह प्रान नंबर फिक्स रहता हैं अगर आप अपना पेंशन ब्रांच/ ऑफिस बदलना भी चाहे तो आसानी से बदल सकते हैं लेकिन आपका प्रान नंबर वही रहता हैं |
  • NPS का सञ्चालन :
NPS की यह क्रिया पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (Pension Fund Regulatory and Development Authority ) की देख रेख में चलती हैं | सभी संभव जानकारी PFRADA से ली जा सकती हैं |
  • टैक्स लाभ :
वर्तमान में, टीयर I में किए गए योगदान के लिए Exempted-Exempted-Taxed (EET) के तहत योगदान राशि धारा 80 सी के अनुसार 1.00 लाख रुपए तक सकल कुल आय से कटौती के लिए हकदार है। यह आयकर नियम के अनुसार समय- समय पर बदलता रहता हैं |
टियर I के तहत योगदान एवम एन्युटी पर कोई टैक्स नहीं हैं लेकिन 60 वर्ष के बाद मिलने वाली पेंशन टैक्सेबल हैं |
यह योजना भविष्य निधी के रूप में सब्सक्राइबर को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाती हैं | आज के वक्त में महंगाई को देखते हुए यह एक बहुत ही लाभप्रद एवम सरल योजना हैं जिससे सब्सक्राइबर आसानी से जुड़ सकता हैं और इसे बिना किसी अधिक भाग दौड़ के सुचारू रख सकता हैं |
गैर सरकारी लोगो के लिए सरकार द्वारा स्वावलंबन योजना का प्रावधान लाया गया था लेकिन उनमे कई कमियाँ होने के कारण अटल पेंशन योजना को लाया गया | और आज देश के कई लोग इस योजना से जुड़ रहे हैं | इसे और भी कामयाब बनाने के लिए सभी को इस योजना से जुड़ना चाहिये |
सरकार द्वारा कई बीमा पॉलिसी भी लाई गई हैं जिसके तहत भी आम जनता फायदा उठ सकती हैं अतः हम सभी को इस तरफ जागरूक होते हुए पेंशन स्कीम एवम बीमा पॉलिसी लेनी चाहिये ताकि वर्तमान एवम भविष्य सुरक्षित हो सके |


 इस तरह की योजना के बारे में आप और क्या जानना चाहते हैं अपने सवाल कमेंट बॉक्स में डाले | हम पूरी कोशिश करेंगे आपकी समस्या सुलझाने में |
यह योजना आपको कैसी लगी और क्या आप इससे जुड़े हैं हमें जरुर बताये | साथ ही इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने दोस्तों से जरुर शेयर करें |
Update
23/07/2018
NPS में अब पचास हज़ार का टैक्स बेनिफिट भी मिलेगा.
23/8/2018
सरकार  नेशनल पेंशन स्कीम अब क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Bank) कर्मचरियों के लिए अनिवार्य होगी. 31 मार्च के बाद ज्वाइन करने वाले सभी कर्मचारियों के लिए ये अनिवार्य होगी.
https://incrediblenewindia.blogspot.com/?m=1&zx=ded15488b962249b

भामाशाह योजना: आप ऐसे ले सकते हैं मदद.....

भामाशाह योजना: आप ऐसे ले सकते हैं मदद

राजस्थान के बीकानेर जिले की बंबलू की नानू देवी को बैसाखियों की मदद से चलने की वजह से पेंशन लाने में बड़ी परेशानी होती थी. पेंशन की रकम पाने के लिए लाइन में लगना उनके लिए बहुत दर्द भरा काम था. 

राजस्थान सरकार की भामाशाह योजना आने के बाद अब सीधे उनके बैंक खाते में पेंशन की रकम आ जाती है. अपने पास के बिजनेस कॉरेसपोंडेंट से वे रुपे कार्ड की मदद से रकम ले लेती हैं. इससे उनका जीवन बहुत आसान हो गया है. 

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राजस्थान सरकार ने महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थी को देने के उद्देश्य से 15 अगस्त 2014 से भामाशाह योजना की शुरूआत की. 

भामाशाह योजना में महिला को परिवार का मुखिया बनाकर बैंक खाते उनके नाम पर खोले जाते हैं. परिवार को मिलने वाले सभी सरकारी नकद लाभ सरकार इसी खाते में देती है. 

सरकार की तरफ से नामांकित सभी बीपीएल, स्टेट बीपीएल, अन्त्योदय व अन्नपूर्णा में चयनित परिवारों की महिला मुखिया के बैंक खाते में सहायता राशि के रुप में एक बार 2000 रुपये जमा कराया जाता है. 

क्या है भामाशाह योजना का उद्देश्य? 
राजस्थान सरकार पेंशन और नरेगा जैसी 54 सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचाना चाहती है. भामाशाह योजना के तहत राज्‍य सरकार का 1.5 करोड़ महिलाओं को लाभ पहुंचाने का लक्ष्‍य है. 

इसके अलावा सरकार की कोशिश यह भी है कि लाभ की यह रकम निकालने के लिए लोगों को दूरदराज के इलाके से शहर तक ना आना पड़े. लोग जहां रहते हैं, भामाशाह योजना की मदद से वे वहीं यह रकम प्राप्त कर सकते हैं. 

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क्या है भामाशाह योजना की प्रक्रिया? 
  • भामाशाह योजना में नामांकन के समय परिवार व उसके सभी सदस्यों की पूरी जानकारी ली जाती है.
  • अगर परिवार के किसी सदस्य को किसी सरकारी योजना का लाभ मिलना है तो उन सबकी जानकारी इसमें शामिल की जाती है. इनमें पेंशन नम्बर, नरेगा जॉब कार्ड नम्बर आदि शामिल हैं.
  • इसके साथ ही सरकारी योजना के लाभार्थियों का बैंक खाता भी भामाशाह योजना से जोड़ा जाता है. नजदीकी ई-मित्र सेंटर पर जाकर भामाशाह योजना में अपना नरेगा, राशन कार्ड और पेंशन नंबर जुड़वाना है.
  • इसके बाद पेंशन, नरेगा, छात्रवृत्ति, जननी सुरक्षा आदि से जुड़े लाभ की रकम तय वक्त पर सीधे उनके बैंक खाते में पहुंच जाती है.

घर के पास रकम निकालने की व्यवस्था 
  • सरकारी योजना के माध्यम से प्राप्त रकम निकालने के लिए लाभार्थियों को रुपे कार्ड की सुविधा दी जाती है.
  • सरकारी योजना के लाभार्थी रुपे कार्ड की मदद से पास के बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) केन्द्र से आसानी से पैसे निकाल सकते हैं.
  • बैंक व एटीएम की सीमित संख्या होने की वजह से राज्य सरकार ने राजस्थान में 35,000 बीसी बनाये हैं.

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मोबाइल पर आता है मैसेज सरकारी योजना के लाभार्थी के खाते में पैसे पहुंचने या निकलने की सूचना मोबाइल पर मैसेज से मिल जाती है. हर साल 2 बार भामाशाह द्वारा बांटे गए लाभ का सामाजिक ऑडिट किया जाता है. 

भ्रष्टाचार कम करने में मददगार 
  • पहले सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में लोगों को देरी होने की शिकायत आती थी. सरकार की तरफ से जारी रकम लाभार्थी तक नहीं पहुंचने, किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर करके लाभ ले लेने जैसी घटनाएं भामाशाह योजना के बाद खत्म हो गयी हैं.
  • अब पेंशन, छात्रवृत्ति, नरेगा आदि की रकम सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है. इसके साथ ही गैर नकद लाभ जैसे-राशन वितरण भी अब बायोमेट्रिक पहचान द्वारा सीधे लाभार्थियों को मिल पा रहे हैं
  • परिवार के साथ नहीं रहने वाले छात्र और विकलांग लोगों को भामाशाह योजना में विशेष आर्थिक मदद मिलती है.
  • भामाशाह योजना की शुरुआत सबसे पहले उदयपुर से की गई थी.

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इस योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप 1800-180 6127 पर कॉल कर सकते हैं. 

आप इस वेबसाइट से भी राजस्थान सरकार की भामाशाह योजना के बारे में जानकारी ले सकते हैं:http://suraaj.rajasthan.gov.in/hi/bhamashah-yojana 

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नारलाई (पाली),राजस्थान

नारलाई (पाली),राजस्थान

Tejaram dewasi

नरलाई एक छोटी पहाड़ी पर बसा एक छोटा सा गाँव है | यह रणकपुर टाउन से 36 किमी की दूरी पर स्थित है। यात्री इस क्षेत्र कई जैन मंदिर और हिंदू मंदिर देख  सकते हैं। यात्रियों के बीच, जैन समुदाय के पहले तिर्थंकार भगवान आदिनाथ के मंदिर के भित्ति चित्रों और उसकी वास्तुकला बहुत लोकप्रिय है।
इस सुंदर गांव में 17 वें हंटिंग लॉज है जिसे अब पुन: बना दिया गया  है। छोटी हवेली से पहाड़ी के सुंदर नज़ारें जो कई पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करता है|

गूगल मानचित्र पर नरलाई, पाली

नारलाई, पाली तक कैसे पहुंचे

सड़क द्वारा : नरलाई कुम्भलगढ़ नेशनल पार्क के पास पाली जिले में स्थित है, जो रणकपुर से 36 किलोमीटर की दूरी पर है और उदयपुर से 123 किमी दूर है। जहाँ  आसानी से बस या टैक्सी से पंहुचा जा सकता है|
रेल द्वारा: नरलाई निकटतम उदयपुर रेलवे स्टेशन से पंहुचा जा सकता है जो प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, आगरा, मुंबई, चेन्नई, बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, अहमदाबाद के रेलवे स्टेशनों से भलीभांति  जुड़ा हुआ है।
हवाई यात्रा से: नरलाई निकटतम उदयपुर हवाईअड्डा तक पंहुचा सकता है जो कि दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, अहमदाबाद, जोधपुर और जयपुर के लिए नियमित डोमेस्टिक उड़ानों से जुड़ा हुआ है।



narlai-rajasthan

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मेवाड़ राजवंश का संक्षिप्त इतिहास


मेवाड़ राजवंश का संक्षिप्त इतिहास

Posted on Jun 24, 2016


वीर प्रसूता मेवाड की धरती राजपूती प्रतिष्ठा, मर्यादा एवं गौरव का प्रतीक तथा सम्बल है। राजस्थान के दक्षिणी पूर्वी अंचल का यह राज्य अधिकांशतः अरावली की अभेद्य पर्वत श्रृंखला से परिवेष्टिता है। उपत्यकाओं के परकोटे सामरिक दृष्टिकोण के अत्यन्त उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है। >मेवाड अपनी समृद्धि, परम्परा, अधभूत शौर्य एवं अनूठी कलात्मक अनुदानों के कारण संसार के परिदृश्य में देदीप्यमान है। स्वाधिनता एवं भारतीय संस्कृति की अभिरक्षा के लिए इस वंश ने जो अनुपम त्याग और अपूर्व बलिदान दिये सदा स्मरण किये जाते रहेंगे। मेवाड की वीर प्रसूता धरती में रावल बप्पा, महाराणा सांगा, महाराण प्रताप जैसे सूरवीर, यशस्वी, कर्मठ, राष्ट्रभक्त व स्वतंत्रता प्रेमी विभूतियों ने जन्म लेकर न केवल मेवाड वरन संपूर्ण भारत को गौरान्वित किया है। स्वतन्त्रता की अखल जगाने वाले प्रताप आज भी जन-जन के हृदय में बसे हुये, सभी स्वाभिमानियों के प्रेरक बने हुए है। मेवाड का गुहिल वंश संसार के प्राचीनतम राज वंशों में माना जाता है। मान्यता है कि सिसोदिया क्षत्रिय भगवान राम के कनिष्ठ पुत्र लव के वंशज हैं




 मेवाड में गहलोत राजवंश – बप्पा ने सन 734 ई० में चित्रांगद गोरी परमार से चित्तौड की सत्ता छीन कर मेवाड में गहलौत वंश के शासक का

सूत्रधार बनने का गौरव प्राप्त किया। इनका काल सन 734 ई० से 753 ई० तक था। इसके बाद के शासकों के नाम और समय काल निम्न था –
रावल बप्पा ( काल भोज ) – 734 ई० मेवाड राज्य के गहलौत शासन के सूत्रधार।
रावल खुमान – 753 ई०
मत्तट – 773 – 793 ई०
भर्तभट्त – 793 – 813 ई०
रावल सिंह – 813 – 828 ई०
खुमाण सिंह – 828 – 853 ई०
महायक – 853 – 878 ई०
खुमाण तृतीय – 878 – 903 ई०
भर्तभट्ट द्वितीय – 903 – 951 ई०
अल्लट – 951 – 971 ई०
नरवाहन – 971 – 973 ई०
शालिवाहन – 973 – 977 ई०
शक्ति कुमार – 977 – 993 ई०
अम्बा प्रसाद – 993 – 1007 ई०
शुची वरमा – 1007- 1021 ई०
नर वर्मा – 1021 – 1035 ई०
कीर्ति वर्मा – 1035 – 1051 ई०
योगराज – 1051 – 1068 ई०
वैरठ – 1068 – 1088 ई०
हंस पाल – 1088 – 1103 ई०
वैरी सिंह – 1103 – 1107 ई०
विजय सिंह – 1107 – 1127 ई०
अरि सिंह – 1127 – 1138 ई०
चौड सिंह – 1138 – 1148 ई०
विक्रम सिंह – 1148 – 1158 ई०
रण सिंह ( कर्ण सिंह ) – 1158 – 1168 ई०
क्षेम सिंह – 1168 – 1172 ई०
सामंत सिंह – 1172 – 1179 ई०
(क्षेम सिंह के दो पुत्र सामंत और कुमार सिंह। ज्येष्ठ पुत्र सामंत मेवाड की गद्दी पर सात वर्ष रहे क्योंकि जालौर के कीतू चौहान मेवाड पर अधिकार कर लिया। सामंत सिंह अहाड की पहाडियों पर चले गये। इन्होने बडौदे पर आक्रमण कर वहां का राज्य हस्तगत कर लिया। लेकिन इसी समय इनके भाई कुमार सिंह पुनः मेवाड पर अधिकार कर लिया। )

कुमार सिंह – 1179 – 1191 ई०
मंथन सिंह – 1191 – 1211 ई०
पद्म सिंह – 1211 – 1213 ई०
जैत्र सिंह – 1213 – 1261 ई०
तेज सिंह -1261 – 1273 ई०
समर सिंह – 1273 – 1301 ई०
(समर सिंह का एक पुत्र रतन सिंह मेवाड राज्य का उत्तराधिकारी हुआ और दूसरा पुत्र कुम्भकरण नेपाल चला गया। नेपाल के राज वंश के शासक कुम्भकरण के ही वंशज हैं। )

35. रतन सिंह ( 1301-1303 ई० ) – इनके कार्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौडगढ पर अधिकार कर लिया। प्रथम जौहर पदमिनी रानी ने सैकडों महिलाओं के साथ किया। गोरा – बादल का प्रतिरोध और युद्ध भी प्रसिद्ध रहा।
36. अजय सिंह ( 1303 – 1326 ई० ) – हमीर राज्य के उत्तराधिकारी थे किन्तु अवयस्क थे। इसलिए अजय सिंह गद्दी पर बैठे।
37. महाराणा हमीर सिंह ( 1326 – 1364 ई० ) – हमीर ने अपनी शौर्य, पराक्रम एवं कूटनीति से मेवाड राज्य को तुगलक से छीन कर उसकी खोई प्रतिष्ठा पुनः स्थापित की और अपना नाम अमर किया महाराणा की उपाधि धारण की । इसी समय से ही मेवाड नरेश महाराणा उपाधि धारण करते आ रहे हैं।
38. महाराणा क्षेत्र सिंह ( 1364 – 1382 ई० )
39. महाराणा लाखासिंह ( 1382 – 11421 ई० ) – योग्य शासक तथा राज्य के विस्तार करने में अहम योगदान। इनके पक्ष में ज्येष्ठ पुत्र चुडा ने विवाह न करने की भीष्म प्रतिज्ञा की और पिता से हुई संतान मोकल को राज्य का उत्तराधिकारी मानकर जीवन भर उसकी रक्षा की।
40. महाराणा मोकल ( 1421 – 1433 ई० )
41. महाराणा कुम्भा ( 1433 – 1469 ई० ) – इन्होने न केवल अपने राज्य का विस्तार किया बल्कि योग्य प्रशासक, सहिष्णु, किलों और मन्दिरों के निर्माण के रुप में ही जाने जाते हैं। कुम्भलगढ़ इन्ही की देन है. इनके पुत्र उदा ने इनकी हत्या करके मेवाड के गद्दी पर अधिकार जमा ल

एक अशुद्ध बेवकूफ.......

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अ+   अ-
व्यंग्य
एक अशुद्ध बेवकूफ


बिना जाने बेवकूफ बनाना एक अलग और आसान चीज है। कोई भी इसे निभा देता है।
मगर यह जानते हुए कि मैं बेवकूफ बनाया जा रहा हूं और जो मुझे कहा जा रहा है, वह सब झूठ है- बेवकूफ बनते जाने का एक अपना मजा है। यह तपस्या है। मैं इस तपस्या का मजा लेने का आदी हो गया हूं। पर यह महंगा मजा है- मानसिक रूप से भी और इस तरह से भी। इसलिए जिनकी हैसियत नहीं है उन्हें यह मजा नहीं लेना चाहिए। इसमें मजा ही मजा नहीं है- करुणा है, मनुष्य की मजबूरियों पर सहानुभूति है, आदमी की पीड़ा की दारुण व्यथा है। यह सस्ता मजा नहीं है। जो हैसियत नहीं रखते उनके लिए दो रास्ते हैं- चिढ़ जायें या शुद्ध बेवकूफ बन जायें। शुद्ध बेवकूफ एक दैवी वरदान है, मनुष्य जाति को। दुनिया का आधा सुख खत्म हो जाए, अगर शुद्ध बेवकूफ न हों। मैं शुद्ध नहीं, 'अशुद्ध' बेवकूफ हूं। और शुद्ध बेवकूफ बनने को हमेशा उत्सुक रहता हूं।
अभी जो साहब आये थे, निहायत अच्छे आदमी हैं। अच्छी सरकारी नौकरी में हैं। साहित्यिक भी हैं। कविता भी लिखते हैं। वे एक परिचित के साथ मेरे पास कवि के रूप में आये। बातें काव्य की ही घंटा भर होती रहीं- तुलसीदास, सूरदास, गालिब, अनीस वगैरह। पर मैं 'अशुद्ध' बेवकूफ हूं, इसलिए काव्य-चर्चा का मजा लेते हुए भी जान रहा था कि भेंट के बाद काव्य के सिवाय कोई और बात निकलेगी। वे मेरी तारीफ भी करते रहे और मैं बरदाश्त करता रहा। पर मैं जानता था कि वे साहित्य के कारण मेरे पास नहीं आये।
मैंने उनसे कविता सुनाने को कहा। आमतौर पर कवि कविता सुनाने को उत्सुक रहता है, पर वे कविता सुनाने में संकोच कर रहे थे। कविता उन्होंने सुनायी, पर बड़े बेमन से। वे साहित्य के कारण आये ही नहीं थे- वरना कविता की फरमाइश पर तो मुर्दा भी बोलने लगता है।
मैंने कहा- कुछ सुनाइए।
वे बोले- मैं आपसे कुछ लेने आया हूं।
मैंने समझा ये शायद ज्ञान लेने आये हैं।
मैंने सोचा- यह आदमी ईश्वर से भी बड़ा है। ईश्वर को भी प्रोत्साहित किया जाए तो वह अपनी तुकबंदी सुनाने के लिए सारे विश्व को इकट्ठा कर लेगा।
पर ये सज्जन कविता सुनाने में संकोच कर रहे थे और कह रहे थे- हम तो आपसे कुछ लेने आये हैं।
मैं समझता रहा कि ये समाज और साहित्य के बारे में कुछ ज्ञान लेने आये हैं।
कविताएं उन्होंने बड़े बेमन से सुना दीं। मैंने तारीफ की, पर वे प्रसन्न नहीं हुए। यह अचरज की सी बात थी। घटिया से घटिया साहित्यिक सर्जक भी प्रशंसा से पागल हो जाता है। पर वे जरा भी प्रशंसा से विचलित नहीं हुए।
उठने लगे तो बोले- डिपार्टमेंट में मेरा प्रमोशन होना है। किसी कारण अटक गया है। जरा आप सेक्रेटरी से कह दीजिए, तो मेरा काम हो जाएगा।
मैंने कहा- सेक्रेटरी क्यों? मैं मन्त्री से कह दूंगा। पर आप कविता अच्छी लिखते हैं।
एक घण्टे जानकर भी मैं साहित्य के नाम पर बेवकूफ बना- मैं 'अशुद्ध' बेवकूफ हूं।
एक प्रोफेसर साहब क्लास वन के। वे इधर आये। विभाग के डीन मेरे घनिष्ठ मित्र हैं, यह वे नहीं जानते थे। यों वे मुझसे पच्चीसों बार मिल चुके थे। पर जब वे डीन के साथ मिले तो उन्होंने मुझे पहचाना ही नहीं। डीन ने मेरा परिचय उनसे करवाया। मैंने भी ऐसा बर्ताव किया, जैसे यह मेरा उनसे पहला परिचय है।
डीन मेरे यार हैं। कहने लगे- यार चलो केण्टीन में, अच्छी चाय पी जाय। अच्छा नमकीन भी मिल जाए तो मजा आ जाय।
अब क्लास वन के प्रोफेसर साहब थोड़ा चौंके।
हम लोगों ने चाय और नाश्ता किया। अब वे समझ गये कि मैं 'अशुद्ध' बेवकूफ हूं।
कहने लगे- सालों से मेरी लालसा थी कि आपके दर्शन करूं। आज यह लालसा पूर्ण हुई।(हालांकि वे कई बार मिल चुके थे। पर डीन सामने थे।)
अंग्रेजी में एक बड़ा अच्छा मुहावरा है- 'टेक इट विद ए पिंच ऑफ साल्ट'- याने थोड़े नमक के साथ लीजिए। मैंने अपनी तारीफ थोड़े नमक के साथ ले ली।
शाम को प्रोफेसर साहब मेरे घर आये। कहने लगे- डीन साहब तो आपके बड़े घनिष्ठ हैं। उनसे कहिए न कि मुझे पेपर दे दें, कुछ कांपियां भी- और 'माडरेशन' के लिए बुला लें तो और अच्छा है।
मैंने कहा- मैं ये सब काम डीन से आपके करवा दूंगा। पर आपने मुझे पहचानने में थोड़ी देर कर दी थी।
बेचारे क्या जवाब देते? अशुद्ध बेवकूफ मैं- मजा लेता रहा कि वे क्लास वन के अफसर नहीं, चपरासी की तरह मेरे पास से विदा हुए। बड़ा आदमी भी कितना बेचारा होता है।
एक दिन मई की भरी दोपहर में एक साहब आ गये। भयंकर गर्मी और धूप। मैंने सोचा कि कोई भयंकर बात हो गई है, तभी ये इस वक्त आये हैं। वे पसीना पोंछकर वियतनाम की बात करने लगे। वियतनाम में अमरीकी बर्बरता की बात कर रहे थे। मैं जानता था कि मैं निक्सन नहीं हूं। पर वे जानते थे कि मैं बेवकूफ हूं। मैं भी जानता था कि इनकी चिंता वियतनाम नहीं है।
घण्टे-भर राजनीतिक बातें हुईं।
वे उठे तो कहने लगे- मुझे जरा दस रुपये दे दीजिए।
मैंने दे दिए और वियतनाम की समस्या आखिर कुल दस रुपये में निपट गई।
एक दिन एक नीति वाले भी आ गये। बड़े तैश में थे।
कहने लगे- हद हो गयी! चेकोस्लोवाकिया में रूस का इतना हस्तक्षेप! आपको फौरन वक्तव्य देना चाहिए।
मैंने कहा- मैं न रूस का प्रवक्ता हूं न चेकोस्लोवाकिया का। मेरे बोलने से क्या होगा।
वे कहने लगे- मगर आप भारतीय हैं, लेखक हैं, बुद्धिजीवी हैं। आपको कुछ कहना ही चाहिए।
मैंने कहा- बुद्धिजीवी वक्तव्य दे रहे हैं। यही काफी है। कल वे ठीक उल्टा वक्तव्य भी दे सकते हैं, क्योंकि वे बुद्धिजीवी हैं।
वे बोले- याने बुद्धिजीवी बेईमान भी होता है?
मैंने कहा- आदमी ही तो ईमानदार और बेईमान होता है। बुद्धिजीवी भी आदमी ही है। वह सुअर या गधे की तरह ईमानदार नहीं हो सकता। पर यह बतलाईये कि इस समय क्या आप चेकोस्लोवाकिया के कारण परेशान हैं? आपकी पार्टी तो काफी नारे लगा रही है। एक छोटा सा नारा आप भी लगा दें और परेशानी से बरी हो जाएं।
वे बोले- बात यह है कि मैं एक खास काम से आपके पास आया था। लड़के ने रूस की लुमुम्बा यूनिवर्सिटी के लिए दरख्वास्त दी है। आप दिल्ली में किसी को लिख दें तो उसका सिलेक्शन हो जाएगा।
मैंने कहा- कुल इतनी-सी बात है। आप चेकोस्लोवाकिया के कारण परेशान हैं। रूस से नाराज हैं। पर लड़के को स्कालरशिप पर रूस भेजना भी चाहते हैं।
वे गुमसुम हो गए। मुझ अशुद्ध बेवकूफ की दया जाग गयी।
मैंने कहा- आप जाइए। निश्चिंत रहिए- लड़के के लिए जो मैं कर सकता हूं करूंगा।
वे चले गए। बाद में मैं मजा लेता रहा। जानते हुए बेवकूफ बनने-वाले 'अशुद्ध' बेवकूफ के अलग मजे हैं।
मुझे याद आया गुरु कबीर ने कहा था- 'माया महा ठगनि हम जानी'।

अंधविश्‍वासी समाज

             भारत हमेशा से अंधविश्‍वासी लोगों की भूमि रही है। हर धर्म, हर संस्‍कृति और समुदाय में लोगों ने अलग-अलग अंधविश्‍वासों को जगह द...