Wednesday, March 6, 2019

असहिष्णुता क्या है और अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस 2019

न‌यें भारत की नई पहचान

By Incredible newindia [Tejaram Dewasi]

असहिष्णुता क्या है और अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस 2019 

भारत शुरू से ही धार्मिक प्रवृत्ति का रहा है. यहाँ कई दैवीय जन्म होने की मान्यता है, कई ऋषि मुनि हुए जो सभी की धर्म के प्रति आस्था बढ़ाते हैं. भारत के इतिहास में युगों से ऋषि, मुनि, राजा-महाराजा संयम को अपनाते हुए निरंतर आगे बढ़ते रहे हैं. धर्म के वेद –पुराणों में पूरी पृथ्वी को एक परिवार माना गया है.  हम पृथ्वी को माता के रूप में देखते हैं और माता के सहनशीलता तथा निरंतरता के गुण को आत्मसात करना अपना कर्तव्य समझते हैं.  
"वसुधेव कुटुंबकम” की मान्यता है, अर्थात पूरा विश्व एक ही परिवार है, का सिद्धान्त देने वाला भारत सदियों से सहिष्णुता, पारस्परिक स्नेह और सौहार्द का पक्षधर रहा हैं. लेकिन वर्तमान में वैश्विक स्तर पर सहिष्णुता लुप्तप्राय: हैं. जैसे-जैसे वैश्वीकरण हो रहा हैं वैसे-वैसे दुनिया के विभिन्न समाजों एवं देशों में विविध प्रकार का परिवर्तन देखा जा रहा है. वैश्वीकरण से संवाद और विनिमय के तो कई अवसर बन रहे हैं,लेकिन कई नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. असमानता और गरीबी से लगातार संघर्ष देशों की प्रगति को धीमा कर रहा है. इन समस्याओं के बहुत से कारणों में से एक असहिष्णुता भी एक हैं.
असहिष्णुता क्या है? ( Intolerance Definition, Meaning)
सहिष्णुता का विपरीत होता है “असहिष्णुता”. असहिष्णुता अर्थात सहने की शक्ति नहीं होना. भारत को संयमित, सहनशील राष्ट्र के रूप में देखा जाता है. परंतु आजकल यह देखने एवं सुनने में आ रहा है, भारत के लोग असहिष्णु होते जा रहे हैं. भारत की जनता किसी भी घटना पर तुरंत ही अपनी प्रतिक्रिया देने लग गयी है. देश में होने वाली छोटी सी भी घटना पर देश की जनता आक्रोशित होने लगी है एवं अपना संयम तथा सहनशीलता खोने लगी है. अपने विचारों को प्रकट करने में लोग छोटी छोटी बातों को तूल देते हुए बड़ा करने में लगे हैं. कई बार छोटी छोटी घटना से विवाद इतना बढ़ जाता है, कि लोगों की जान पर बन आती है. 
intolerance Tolerance Day
इतिहास (History of International Day for Tolerance)
1993 में विधानसभा (रिजोल्यूशन 48/126) द्वारा उद्घोषणा किये जाने के बाद 1995 में यूनाइटेड नेशन ईयर फॉर टोलेरेंस के वर्ष में  एक्शन लिया गया था, जिसके अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाने के प्रस्ताव के साथ आम-जन के लिए विविध गतिविधियाँ तय की गयी थी.  1995 से पहले हुई यूनेस्को की जनरल कांफ्रेंस में यूनाइटेड नेशन ईयर फॉर टोलेरेंस का वर्ष मनाने की घोषणा की गयी थी. 1996 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यू एम जनरल एसेम्बली)  के सदस्य राज्यों को 16 नवंबर को सहिष्णुता के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाने के लिए आमंत्रित किया , जिसमें शैक्षणिक प्रतिष्ठानों और जनता (12 दिसंबर के रिजोल्यूशन 51/95)के लिए विभिन्न क्रियाविधियाँ निर्धारित की गई यूनेस्को के सदस्य देशों ने अगले वर्ष के लिए 16 नवंबर, 1995 को सहिष्णुता और इस सिद्धांत से सम्बंधित योजनाओं की घोषणा को स्वीकार किया. इसके बाद 2005 में हुआ विश्व शिखर सम्मेलन  मानव कल्याण, हर जगह स्वतंत्रता और प्रगति, सहिष्णुता, सम्मान, संवाद और विभिन्न संस्कृतियों, सभ्यताओं और लोगों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न राज्य सरकारों के प्रमुखों को प्रतिबद्ध करने के लिए जाना जाता हैं. इस कारण ही विश्व सहिष्णुता दिवस के संदर्भ में बात करने पर 2005 के विश्व शिखर सम्मेलन की बात करना भी जरूरी हो जाता हैं.

अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस क्यों मनाया जाता हैं?? (Why International Day for Tolerance celebrate)
पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद, हिंसा, रंगभेद जैसी कई गतिविधियाँ सामने आई हैं जिसके कारण कुछ देशों का, धर्म का, अल्पसंख्यकों का , शरणार्थीयों और प्रवासियों  के आधारभूत मानवाधिकारों का हनन होने लगा हैं. इन सबसे विश्व भर में लोकतंत्र, शान्ति और विकास की दिशा में कई बाधाएं आ रही हैं. इन परिस्थितियों में मानवता का अस्तित्व बचाने के लिए शांति और सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए वर्ष में एक ऐसा दिन मनाने की आवश्यकता हुई जब लोगों को सहिष्णुता के प्रति जागरूक किया जा सके और असहिष्णुता के कारण होने वाले खतरों के प्रति जागरूक किया जा सके.
 सहिष्णुता दिवस उद्देश्य (Objectives)
इस दिन को मनाने का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य विश्व भर में लोगों को सहिष्णुता का महत्व समझाना हैं. आज राजनीति के अंतर्गत विभिन्न राजनेताओं द्वारा  दिए जाने वाले विभाजन के भाषण आसानी से देखे जा सकते हैं, जिन पर प्रतिक्रिया में हिंसा का फैलना ही असहिष्णुता का उदाहरण हैं. किसी भी समाज में शक्तिशाली वर्ग का रूप यदि नकारात्मक हो और शोषण करने वाला हो, तो असहिष्णुता के लिए अच्छी जमीन तैयार हो जाती हैं. शोषित वर्ग को दबाना और उनके तर्क एवं पक्ष को खारिज करना ही असहिष्णुता की श्रेणी में आता हैं. सहिष्णुता का सम्बंध केवल इन दो वर्गों के मध्य ही नहीं हैं, जहां भी सोच का टकराव होता हो या जहां भी हितों की प्रतिस्पर्धा होती हो, वहाँ पर असहिष्णुता का उद्भव होता ही हैं. कई बार ये असहिष्णुता नफरत में परिणीत हो जाती हैं, जिसका परिणाम विनाशकारी सिद्ध हो सकता हैं.
असहिष्णुता की शुरुआत हमेशा छोटे-छोटे मुद्दों से होती हैं, जैसे किसी एक अपराधी के कारण पूरे वर्ग को दोषी मानकर उन्हें समाज में उचित स्थान और सम्मान ना देना, या फिर किसी देश विशेष में होने वाली कुछ नकारात्मक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए विश्व समुदाय का उस देश को ही उसके अधिकारों से वंचित करना जैसी कई बातें हैं, जो वैश्विक स्तर पर असहिष्णुता में आती हैं. लेकिन मानवता एक ऐसा आधारभूत योजक हैं, जिसने सम्पूर्ण विश्व को आपस में जोड़ रखा हैं. इसके अलावा प्यार और सौहार्द से किसी भी तरह की नफरत की खाई को कम किया  जा सकता हैं. दुनिया में स्नेह और सौहार्द को फ़ैलाने के लिए ही सहिष्णुता दिवस मनाने की आवश्यकता महसूस हुई हैं. क्योंकि दुनिया में विभिन्न देशों की भले संस्कृतियां अलग-अलग हैं, लेकिन मानवता के तौर पर अपने मूल्यों की साझेदारी और अतीत एवं भविष्य को भुलाकर वर्तमान में सम्मानपूर्वक जीवन जीना और जीने देना ही है, वैश्विक स्तर पर सहिष्णुता दर्शाने का अच्छा तरीका  हैं.
यूनाइटेड स्टेट का उद्देश्य पूरे विश्व में सहिष्णुता,मानवता ,सौहार्द एवं स्नेह को बढावा देना हैं. आधुनिक युग में बढती नफरत और हिंसा को रोकने के लिए ये बहुत आवश्यक हैं, कि इस दिशा में यथायोग्य कदम उठाए जाए. क्योंकि प्रत्येक मानव को शान्ति-पूर्ण और सम्मान के साथ जीने का अधिकार हैं,और इस तरह के प्रयासों ही विश्व में सहिष्णुता एवं सौहार्द विकसित की जा सकती हैं.
यूनाइटेड नेशन में यूनेस्को का औचित्य ही मानवता के हित के लिए आवश्यक काम करना और इसको प्रोत्साहन देना ही हैं. सहिष्णुता के माध्यम से ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विभिन संस्कृतियों और धर्मों को सम्मान और महिला सशक्तिकरण जैसे आवश्यक कार्य किये जा सकते हैं.
अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस प्रतीक  (Symbols)
यूनेस्को के चिन्ह (logo) में एक मन्दिर को दिखाया गया हैं, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन के बारे में बताने के लिए यूनेस्को के संक्षिप्त नाम (UNESCO) का उपयोग कियागया हैं. और इस मंदिर के नीचे “यूनाइटेड नेशन्स एजुकेशनल,साइंटिफिक एंड कल्चरल ओर्गनाइजेशन” शब्द लिखा गया हैं, जिसका हिंदी अर्थ “संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन” हैं. इस चिन्ह का उपयोग अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस के लिए ऑनलाइन या मुद्रित प्रचार सामग्री में किया जाता है.
यूनेस्को के पूरे नाम का उपयोग विभिन्न भाषाओँ में भी किया जाता है, लेकिन इसे समझने के लिए किसी निर्धारित भाषा के साथ ही इंग्लिश में पूरा नाम भी लिखा जाता हैं, जिससे संस्था के संक्षिप्त नाम (एक्रोनिम) को समझा जा सके. यूनेस्को की 6 आधिकारिक भाषाएं अरेबिक, चाइनीज, इंग्लिश, फ्रेंच, रशियन और स्पेनिश हैं. 1995 में ही यूनेस्को ने महात्मा गांधी के 125वीं वर्षगाँठ पर सहिष्णुता और अहिंसा को प्रोत्साहन देने और इसका प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से  मदनजीत सिंह पारितोषिक (प्राइज) देना भी तय किया था. ये पुरूस्कार हर 2 वर्ष में विज्ञान, कला, संस्कृति या कम्युनिकेशन में अच्छा प्रदर्शन करने वाली किसी संस्था या व्यक्ति को दिया जाता हैं.
अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस (International Day for Tolerance 2018 Date)
1
दिवस (Event Name)
अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस
2
मनाने की तारीक (Date Of Celebration)
16 नवंबर प्रति वर्ष
3
पहली बार कब मनाया गया (First Observed On)
1995
4
किसने शुरू किया (First Observed By)
युनेस्को द्वारा
5
कौन अनुसरण करता हैं ? (Followers)
अंतराष्ट्रीय स्तर
कैसे मनाया जाता हैं? ( How to celebrate)
इस दिन हर देश की सरकार आम-जन को सहिष्णुता के प्रति जागरूक होने के लिए प्रेरित करती हैं, इसके लिए कई प्रकार के आयोजन किये जाते हैं. इसके लिए स्कूल में कई तरह के कार्यक्रम किये जाते हैं, जिसमें पोस्टर बनाना, वाद-विवाद और कार्यशाला का आयोजन किया जाता हैं. बच्चों को न्याय, सहिष्णुता, नैतिकता जैसे मूलभूत  जानकारियों की शिक्षा दी जाती हैं. इस दिन मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता अभियान जाता हैं, कुछ संस्थाएं ऐसे आयोजन भी करती हैं, जिसमें मानवाधिकारों के साथ ही सहिष्णुता के मूद्दे पर भी चर्चा की जाती हैं. सोशल मीडिया पर भी इसका ट्रेंड रहता हैं, अपने आस-पास के मुद्दों पर लिखकर या फोटोज के माध्यम से दिखाकर भी लोग सहिष्णुता को समझने और समझाने का प्रयत्न करते हैं.
2018 में विश्व सहिष्णुता दिवस (International Day for Tolerance 2018 date)
प्रति वर्ष की भांति 2018 में भी यह अपने लिए नियत दिवस 16 नवंबर को ही मनाया जाएगा और इस बार ये 22वां वर्ष होगा, जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहिष्णुता दिवस का आयोजन किया जाएगा. यूएन का अंतर्राष्ट्रीय असहिष्णुता दिवस वैश्विक स्तर पर मनाया जाने वाला दिन हैं, लेकिन इस दिन अवकाश नहीं होता हैं.
2018 इवेंट्स (2018 events)
2018 में यूट्यूब के सहयोग से 16 नवंबर को  यूनाइटेड नेशन का short फिल्म की स्क्रीनिंग करने का आयोजन किया जाएगा. एजुकेशन आउट रिसर्च सेक्शन और मानवाधिकारों के यूनाइटेड नेशन हाई कमिश्नर  ऑफिस  से 4 प्रतिनिधियों और रचनाकार इस कार्यक्रम में दर्शकों और छात्रों के साथ  होने वाली चर्चा में भाग लेंगे. कार्यक्रम में 750 प्रतिभागी प्रेजेंटेशन देंगे जिनमें से चुने गये छात्र/छात्रा ही 4 प्रतिनिधियों के साथ होने वाले डिस्कशन में भाग ले सकेंगे.
वास्तव में सहिष्णुता शान्ति की दिशा में उठाया गया पहला कदम हैं. जिससे कई ऐसी नीतियां बनाई जा सकती हैं, जिससे विविधता को बढ़ावा मिले.  इससे समाज में व्याप्त स्त्री-पुरुष असमानता, क्षेत्रवाद, जातिवाद, रंगभेद जैसी कई विभेदनकरी नीतियों का उन्मूलन किया जा सकता हैं. और इन सबके कारण समाज में व्याप्त हुयी असमानता और नफरत को कम किया जा सकता हैं.
असहिष्णुता का विरोध ( Against Intolerance):
आजकल कई बार यह सुनने में आया कि कई महान हस्तियों द्वारा अपने पुरस्कार लौटा दिये गए, कुछ अभिनेता भारत में रहने में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. यह सब असहिष्णुता के कारण ही हो रहा है. दादरी में कुछ लोगों ने मिल कर एक युवक को सिर्फ इसलिए मार डाला, क्यूंकि उन्हें शक था की वो व्यक्ति गोमांस का उपयोग करता है. पूरी बात जाने बिना ही लोग अपना रोष प्रकट करने में लगे हैं. इसके बाद दादरी की इस घटना का विरोध करते हुए नयनतारा सहगल (भारतीय अँग्रेजी लेखिका) ने साहित्य अकादेमी पुरस्कार लौटा दिया. इस कड़ी में कई महानविभूतियों ने भी भारत में बढ़ रही असहिष्णुता के विरोध में अपने पुरस्कार लौटा दिये.
असहिष्णुता पर आमिर खान की टिप्पणी (Aamir Khan Intolerance issue in India):
भारत में बढ़ रहे असहिष्णुता के दौर में आमिर खान ने उनकी पत्नी किरण राव के विचार बताते हुए कहा, कि कई बार वे भारत में रहने में असुरक्षित महसूस करते हैं और इसलिए क्या उन्हे भारत छोड़ देना चाहिए? उनके इस कथन ने पूरे भारत को आहत किया. लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए कि क्या वाकई भारत एक“असुरक्षित राष्ट्र” हो गया है, जहाँ लोगों की सुरक्षा का हमेशा डर रहता है.
अनमोल वचन [International day of tolerance quotes]
  • सहिष्णुता उसे कहते हैं जिसमें आप हर एक वो अधिकार दूसरे को देते हैं जिसे आप खुद के लिये मांगते हैं.
  • सहिष्णुता मतलब किसी तरह का विश्वास नहीं हैं, यह वह व्यवहार हैं जो आप उनके साथ करते हो जो आपकी बात से सहमत नहीं हैं.
  • सहिष्णु होना या किसी पर दया करना कमजोरी की निशानी नहीं, अपितु ताकत का प्रतीक हैं.
  • उचित शिक्षा का अधिकतम परिणाम सहिष्णुता के व्यवहार को दिखाता हैं.
  • सहिष्णुता की तरफ सहिष्णुता का भाव कायरता दिखाता हैं.
  • सहिष्णुता एक ऐसा व्यवहार हैं, जो आपको उन लोगो को माफ करने में मदद करता हैं जो बोलने से पहले एक बार भी नहीं सोचते.
  • सहिष्णुता को अपने जीवन में लाने के लिये, शत्रु ही सबसे अच्छा गुरु होता हैं. 

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है By Tejaram Dewasi



कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है






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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है
समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता
भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा।

Tuesday, March 5, 2019

राजस्थान मंत्रिमंडल में शामिल सभी मंत्रियों की कुण्डली

            INCREDIBLE NEWINDIA      


         राजस्थान मंत्रिमंडल और मंत्रियों के विभाग






1. अशोक गहलोत , मुख्यमंत्री :
वित्त, आबकारी, आयोजना, नीति आयोजन, कार्मिक, सामान्य प्रशासन, राजस्थान राज्य अन्वेषण ब्यूरो, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग, गृह मामलात और न्याय विभाग।

2. सचिन पायलट, उपमुख्यमंत्री :
सार्वजनिक निर्माण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, विज्ञान व प्रौद्योगिकी और सांख्यिकी।

कैबिनेट मंत्री

3. बीडी कल्ला : ऊर्जा, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, भू-जल, कला, साहित्य, संस्कृति और पुरातत्व

4. शांति कुमार धारीवाल : स्वायत्त शासन, नगरीय विकास एवं आवासन, विधि एवं विधिक कार्य और विधि परामर्शी कार्यालय, संसदीय मामलात

5. परसादी लाल : उद्योग और राजकीय उपक्रम

6. मास्टर भंवरलाल मेघवाल : सामाजिक न्याय—अधिकारिता, आपदा प्रबंधन एवं सहायता

7. लालचंद कटारिया : कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य

8. रघु शर्मा : चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं (ईएसआई) और सूचना व जनसंपर्क

9. प्रमोद भाया : खान, गोपालन

10. विश्वेंद्र सिंह : पर्यटन, देवस्थान

11. हरीश चौधरी : राजस्व, उपनिवेशन, कृषि सिंचित क्षेत्रीय विकास एवं जल उपयोगिता

12. रमेश चंद मीणा : खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले

13. उदयलाल आंजना : सहकारिता, इंदिरा गांधी नहर परियोजना

14. प्रताप सिंह खाचरियावास : परिवहन, सैनिक कल्याण

15. सालेह मोहम्मद : अल्पसंख्यक मामलात, वक्फ और जन अभियोग निराकरण

राज्य मंत्री

16. गोविंद सिंह डोटासरा : शिक्षा—प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार), पर्यटन, देवस्थान

17. ममता भूपेश : महिला एवं बाल विकास (स्वतंत्र प्रभार), जनअभियोग निराकरण, अल्पसंख्यक मामलात, वक्फ

18. अर्जुन सिंह बामनिया : जनजाति क्षेत्रीय विकास (स्वतंत्र प्रभार), उद्योग राजकीय उपक्रम

19. भंवर सिंह भाटी : उच्च शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार), राजस्व उपनिवेशन कृषि सिंचित क्षेत्रीय विकास एवं जल उपयोगिता

20. सुखराम विश्नोई : वन विभाग (स्वतंत्र प्रभार), पर्यावरण विभाग (स्वतंत्र प्रभार), खाद्य-नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले

21. अशोक चांदना : युवा मामले-खेल (स्वतंत्र प्रभार), कौशल-नियोजन व उद्यमिता (स्वतंत्र प्रभार), परिवहन, सैनिक कल्याण

22.टीकाराम जूली : श्रम विभाग (स्वतंत्र प्रभार), कारखाना एवं बॉयलर्स निरीक्षण (स्वतंत्र प्रभार), सहकारिता, इंदिरा गांधी नहर परियोजना  
23.भजनलाल जाटव : गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार), मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग (स्वतंत्र प्रभार), कृषि, पशुपालन और मत्स्य विभाग  
24.राजेंद्र सिंह यादव : आयोजना (जनशक्ति) विभाग (स्वतंत्र प्रभार), स्टेट मोटर गैराज विभाग (स्वतंत्र प्रभार) भाषा विभाग (स्वतंत्र प्रभार), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और आपदा प्रबंधन एवं सहायता  
25.डॉ. सुभाष गर्ग : तकनीकी शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार), संस्कृत शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, आयुर्वेद व भारतीय चिकित्सा, ईएसआई, सूचना एवं जनसंपर्क।

Monday, March 4, 2019

आखिर क्यों मनाई जाती है हर साल महाशिवरात्रि, जानिए ये कथाएं

संपादक- तेजाराम देवासी  Incrediblenewindia.com                              
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आखिर क्यों मनाई जाती है हर साल महाशिवरात्रि, जानिए ये कथाएं

हर साल भारत में महाशिवरात्रि बड़े धूम-धाम से मनाई जाती है। सभी भक्त भगवान शिव को फल-फूल अर्पित करते है और शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करते है। इस दिन भक्त भांग भी पीते है। लेकिन क्या आप जानते है कि शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है। आज हम आपको शिवरात्रि मनाने के कुछ पौराणिक कथाऐं बताएंगे -

महाशिवरात्रि मनाएं जाने के संबंध में पुराणों में कई कथाएं प्रचलित हैं। भागवत पुराण के अनुसार समुंद्र मंथन के समय वासुकि नाग के मुख में भयंकर विष की ज्वालाएं उठी और वे समुद्र के जल में मिश्रित हो विष के रूप में प्रकट हो गई। विष की यह ज्वालाएं संपूर्ण आकाश में फैलकर समस्त चराचर जगत को जलाने लगी। इस भीषण स्थिति से घबरा देव, ऋषि, मुनि भगवान शिव के पास गए तथा भीषण तम स्थिति से बचाने का अनुरोध किया तथा प्रार्थना की कि हे प्रभु इस संकट से बचाइए।
भगवान शिव तो आशुतोष और दानी है। वे तुरंत प्रसन्न हुए तथा तत्काल उस विष को पीकर अपनी योग शक्ति के उसे कंठ में धारण कर लिया तभी से भगवान शिव नीलकंठ कहलाए। उसी समय समुद्र के जल से चंद्र अपनी अमृत किरणों के साथ प्रकट हुए। देवता के अनुरोध पर उस विष की शांति के लिए भगवान शिव ने अपनी ललाट पर चंद्रमा को धारण कर लिया। तब से उनका नाम चंद्रशेखर पड़ा। शिव द्वारा इस महान विपदा को झेलने तथा गरल विष की शांति हेतु उस चंद्रमा की चांदनी में सभी देवों में रात्रि भर शिव की महिमा का गुणगान किया। वह महान रात्रि ही तब से शिवरात्रि के नाम से जानी गई।
लिंग पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्णु दोनों में भी इस बात का विवाद हो गया कि कौन बड़ा है। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि दोनों ही महान महाशक्तियों ने अपनी दिव्य अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग शुरू कर युद्ध घोषित कर दिया। चारों ओर हाहाकार मच गया देवताओं, ऋषि मुनियों के अनुरोध पर भगवान शिव इस विवाद को शांत करने के लिए ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए। यह लिंग ज्वालामय प्रतीत हो रहा था तथा इसका ना आदि था और नहीं अंत।
ब्रह्मा विष्णु दोनों ही इस लिंग को देख कर यह समझे नहीं कि यह क्या वस्तु है। विष्णु भगवान सूकर का रूप धारण कर नीचे की ओर उतरे तथा ब्रह्मा हंस का रूप धारण कर ऊपर की और यह जानने के लिए उडे कि इस लिंग का आरंभ हुआ अंत कहां है। दोनों को ही सफलता नहीं मिली, तब दोनों ने ही ज्योतिर्लिंग को प्रणाम किया। उस समय ज्योतिर्लिंग से ओम ॐ की ध्वनि सुनाई दी। ब्रह्मा विष्णु दोनों आश्चर्यचकित हो गए।
तब देखा कि लिंग के दाहिने और अकार, बांयी ओर उकार और बीच में मकार है। अकार सूर्यमंडल की तरह, उकार अग्नि की तरह तथा मकार चंद्रमा की तरह चमक रहा था और उन तीन कार्यों पर शुद्ध स्फटिक की तरह भगवान शिव को देखा। इस अदभुत दृश्य को देख ब्रह्मा और विष्णु अति प्रसन्न हो शिव की स्तुति करने लगे। शिव ने प्रसन्न हो दोनों को अचल भक्ति का वरदान दिया। प्रथम बार शिव को ज्योतिर्लिंग में प्रकट होने पर इसे शिवरात्रि के रूप में मनाया गया।
कथाएं जो भी है, सच्चाई इस बात की है कि विकट घड़ी में भगवान शिव ने चाहे विषपान से संबंधित समस्या थी या दो महाशक्तियों के युद्ध अशांति की समस्या, भगवान शिव ने साहस, पूर्वक धैर्यपूर्वक जगत के कल्याण हेतु कुशल आपदा प्रबंध किया इस हेतु शिवरात्रि को लोककल्याण उदारता ओर धैर्यता का प्रतीक माना जाता है।

Saturday, March 2, 2019

आतंकवाद की समस्या एवं समाधान


                  Terrorism Essay in Hindi आतंकवाद को हम इस तरह परिभाषित कर सकते है की आतंकवाद कुछ लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हिंसा का प्रयोग करते है| यह युद्ध और निति से पूरी तरह अलग है| आतंकवाद कुछ वर्षों से बढ़ते ही जा रहा है और सबसे ज्यादा आतंकवाद से पीड़ित भारत है और इसका मुख्य कारण पाकिस्तान है| आतंकवाद के उपर  बच्चों को आमतौर पर हर कक्षाओं मे एस्से दिया  जाता है तो चलिए अब नीचे लिखे एस्से को पढ़ते है|

Terrorism Essay in Hindi 100 Words

आज आतंकवाद एक ऐसी वैश्विक समस्या का रुप धारण कर चुका है, जिसकी आग में सारा विश्व जल रहा है| आज कोई भी देश यह दावा नहीं कर सकता कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नहीं है और वह आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त है| सच तो यह है कि आज यह कोई नहीं जानता कि आतंकवाद का अगला निशाना कौन और किस रूप में होगा| हिंसा के द्वारा जनमानस में भय या आतंकवाद पैदा कर उद्देश्यों को पूरा करना ही आतंकवाद कहलाता है| यह उद्देश्य राजनीतिक, धार्मिक या आर्थिक ही नहीं, सामाजिक या अन्य किसी प्रकार का भी हो सकता है|
आतंकवाद पर निबंध - Terrorism Essay in Hindi Language
आतंकवाद पर निबंध – Terrorism Essay in Hindi Language

Terrorism Essay in Hindi 200 Words

वैसे तो आतंकवाद के कई प्रकार है, किंतु इन में से तीन ऐसे हैं जिनसे पूरी दुनिया त्रस्त है राजनीतिक आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता, एवं गैर-राजनीतिक या समाजिक आतंकवाद| श्रीलंका में लिट्टे समर्थकों एवं अफगानिस्तान में तालिबान संगठनों की गतिविधियां राजनीतिक आतंकवाद के उदाहरण है|
जम्मू कश्मीर में अलगाववादी गुटों द्वारा किए गए अपराधिक कृत्य भी राजनीतिक आतंकवाद के ही उदाहरण है| अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन धार्मिक कट्टरता की भावना से अपराधिक कृत्यों को अंजाम देते है| ऐसे आतंकवाद को धार्मिक कट्टरता की श्रेणी में रखा जाता है| अपनी सामाजिक स्थिति या अन्य कारणों से उत्पन्न समाजिक क्रांतिकारी विद्रोह को गैर-राजनीतिक श्रेणी में रखा जाता है| भारत में नक्सलवाद गैर-राजनीतिक आतंकवाद का उदाहरण है|
आतंकवादी हमेशा आतंक फैलाने के नए-नए तरीके आजमाते रहते हैं| भीड़ भरे स्थानों, रेल बसों इत्यादि में बम विस्फोटक करना, रेलवे दुर्घटना करवाने के लिए रेलवे लाइनों की पटरियां उखाड़ देना, वायुयानों का अपहरण कर लेना निर्दोष लोगों या राजनीतिज्ञों को बंदी बना लेना, बैंक डकैती करना इत्यादि कुछ ऐसी आतंकवादी गतिविधियां हैं जिनमें पूरा विश्व पिछले कुछ दशकों से त्रस्त हैं| आज लगभग पूरा विश्व आतंकवाद की चपेट में है और किसी न किसी तरह से पीड़ित है |

Terrorism Essay in Hindi 300 Words

पिछले एक दशक में पूरे विश्व में आतंकवादी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है| 11 सितंबर 2001 को अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुआ आतंकी हमला आतंकवाद के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है| वैसे तो आज लगभग पूरा विश्व ही आतंकवाद की चपेट में है किंतु भारत दुनियाभर में आतंकवाद से सार्वधिक त्रस्त देशों में से एक है| इसका प्रमुख कारण भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान है| भारत और पाकिस्तान में आरंभ से ही जम्मू कश्मीर राज्य विवाद का मुद्दा रहा और दोनों ही देश इस पर अपना अधिकार करना चाहते हैं| पाकिस्तान कश्मीर को हथियाने के लिए अब तक 3 बड़े युद्ध कर चुका है और आए दिन सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करता रहता है, लेकिन अभी तक उसके हाथ असफलता ही लगी है इसलिए उसने भारत को आंतरिक रुप से नुकसान पहुंचाने के लिए आतंकवाद का सहारा लेना शुरू कर दिया है|
जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे और पाकिस्तानी घुसपैठ को रोकते हुए इस राज्य पर अपनी प्रशासनिक पकड़ मजबूत करनी होगी तथा आवश्यकता पड़ने पर पाकिस्तानी से द्विपक्षीय वार्ता के अतिरिक्त उसे प्रति कठोर कदम उठाने के लिए भी तैयार रहना होगा| इसका नतीजा यह निकला है कि यदा-कदा भारत आतंकी हमलों का निशाना बनता रहता है| 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट, 13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हुआ हमला, 7 मार्च 2006 को हुआ  वाराणसी बम धमाका, 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में हुआ बम विस्फोटक, 26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल पर हमला आदि कुछ ऐसी घटनाएं हैं जो भारत को आतंकवाद पीड़ित देश घोषित करती है| इन बड़ी घटनाओं के अतिरिक्त आतंकवादी भारत में अनेक छोटी मोटी घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं|
Terrorism Essay in Hindi Aatankwad Ki Samasya
आतंकवाद पर निबंध – Terrorism Essay in Hindi (Aatankwad Ki Samasya)

Terrorism Essay in Hindi 400 Words

भारत में नक्सलवाद भी अब आतंकवाद का रूप ले चुका है| पहले नक्सलवाद का उद्येश्य अपने वास्तविक हक की लड़ाई थी किंतु अब यह बहुत ही हिंसक विद्रोह के रूप में देश के लिए एक गंभीर समस्या एवं चुनौती बन चुका है| प्रारंभ में यह विद्रोह पश्चिम बंगाल तक सीमित था किंतु धीरे-धीरे यह है उड़ीसा, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ क्षेत्रों में भी फैलता गया| वैसे तो आतंकवाद के प्रमुख कारण राजनीतिक स्वार्थ, सत्ता एवं धार्मिक कट्टरता है किंतु नक्सलवाद जैसे विद्रोही गतिविधियों के सामाजिक कारण भी हैं जिनमें बेरोजगारी एवं गरीबी प्रमुख है विश्व के अधिकतर आतंकवादी संगठन युवाओं की गरीबी एवं बेरोजगारी का लाभ उठा कर ही उन्हें आतंकवाद के अंधे कुएं में कूदने के लिए उकसाने में सफल रहते हैं और बेरोजगार युवा इस काम को करने के लिए तैयार भी हो जाते हैं|
आतंकवाद के संदर्भ में सार्वधिक बुरी बात यह है कि कोई नहीं जानता कि आतंकवादियों का अगला निशाना कौन होगा? इसलिए आतंकवाद नेआज लोगों के जीवन को असुरक्षित बना दिया है और यह मानव जाति के लिए कलंक बन चुका है| आतंकवाद की समस्या का सही समाधान यही हो सकता है कि जिन कारणों से इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है हमें उन्हें दूर करना चाहिए| भारत में कुछ इलाकों में लोग अपने हक के लिए भी नक्सलवाद का सहारा लेते हैं ऐसे इलाकों की पहचान करके उन्हें उन का अधिकार प्रदान कराना अधिक आवश्यक होगा ताकि वह आतंकवाद से दूर रहें|
पाकिस्तान कश्मीर को अपना राज्य बनाने के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देता है और वह पाकिस्तान में आतंकवादियों को ट्रेनिंग भी देता है ताकि भारत में हमला करते रहे हाल ही में पाकिस्तान के आतंकवादियों ने पठानकोट में हमला किया, उरी अटैक किया, नगरोटा अटैक, कभी बारामुला अटैक किया वह अपनी गतिविधियों को अंजाम देते ही रहता है ताकि किसी भी तरह वह कश्मीर को भारत से लग कर दें| पाकिस्तान ने इन सारी घटनाओं को अंजाम दिया फिर भारत के प्रधानमंत्री ने इसका जवाब दिया और पाकिस्तान में एक सर्जिकल स्ट्राइक कर दी| सर्जिकल स्ट्राइक करने के बावजूद भी पाकिस्तान अब भी आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और कश्मीर को भारत से अलग करने की सोचता रहता है|
आतंकवाद की समस्या के समाधान के लिए पूरे विश्व को मिलकर एक व्यापक रणनीति बनानी होगी| आतंकवाद आज वैश्विक समस्या का रूप ले चुका है इसलिए इसका संपूर्ण समाधान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं प्रयासों से ही संभव हो पाएगा| इसमें संयुक्त राष्ट्रीय संघ, इंटरपोल एवं अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय को भी अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी और आतंकवाद की समस्या को हमें जड़ से खत्म करना होगा|
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